राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो गया। सत्र के पहले ही दिन विपक्ष द्वारा जोरदार हंगामा कर सरकार को घेरने का प्रयास किया गया। इस दौरान सबसे मुश्किल चुनौती हनुमान बेनीवाल बने, जो पूरी सरकार पर अकेली भारी पड़े।
सदन के बाहर से सरकार को घेरना शुरू किए हनुमान बेनीवाल सत्र के शुरू होते ही सदन के अंदर भी पूरी सरकार को तमाम मुद्दों को लेकर जमकर कोसा। राज्यपाल के अभिभाषण शुरू होने से पहले ही हनुमान बेनीवाल अपनी लय में आ गए और अपने चिरपरिचित अंदाज में किसानों, बेरोजगारों, दलितों और प्रदेश के विकास को अवरुद्ध करने की बात करते हुए राज्य सरकार पर तीखे हमले किए।
इस दौरान हनुमान बेनीवाल बैल में आ गए और किसानों का कर्जा माफ करो के नारेबाजी करने लगे। उन्होंने राज्यपाल से अभिभाषण नहीं पढ़ने की अपील की। बेनीवाल ने कहा कि यह सरकार के झूठ का पुलिंदा है, जो महामहीम द्वारा पढ़ाया जा रहा है।
बेनीवाल के साथ विपक्ष की तरफ से उप नेता प्रतिपक्ष रमेश मीणा और प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक गोविंद सिंह डोटासरा भी नारेबाजी करने लगी और हंगामा शुरू कर दिया। सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ ने परिस्थिति को संभालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक सदन हंगामे की भेंट चढ़ गया। हालांकि सरकार के सदस्यों और विधायकों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
इस दरमियान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चुपचाप पूरे सदन की कार्रवाई एक तक देखती रही। उन्होंने किसी भी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। विधानसभा अध्यक्ष ने बार-बार विपक्ष के सदस्यों को टोका और सदन को सुचारु रुप से चलने के लिए अपील की। लेकिन सदस्य नहीं माने और हंगामा करते रहे।
इससे पहले राज्यपाल कल्याण सिंह ने अभिभाषण पढ़ना शुरू किया तो हनुमान बेनीवाल अकेले ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने लगे। उनके साथ उप नेता प्रतिपक्ष रमेश मीणा ने भी प्रदेश में बेरोजगारों की बदतर स्थिति, किसानों की आत्महत्याएं और कर्ज माफी को लेकर सरकार पर तरह तरह के आरोप लगाए। इसके बाद विपक्ष के मुख्य सचेतक गोविंद सिंह डोटासरा ने भी राज्य में व्याप्त बेरोजगारी, किसानों की आत्महत्या दलितों पर अत्याचार और मीडिया के ऊपर लाए गए ।
सदन के बाहर से सरकार को घेरना शुरू किए हनुमान बेनीवाल सत्र के शुरू होते ही सदन के अंदर भी पूरी सरकार को तमाम मुद्दों को लेकर जमकर कोसा। राज्यपाल के अभिभाषण शुरू होने से पहले ही हनुमान बेनीवाल अपनी लय में आ गए और अपने चिरपरिचित अंदाज में किसानों, बेरोजगारों, दलितों और प्रदेश के विकास को अवरुद्ध करने की बात करते हुए राज्य सरकार पर तीखे हमले किए।
इस दौरान हनुमान बेनीवाल बैल में आ गए और किसानों का कर्जा माफ करो के नारेबाजी करने लगे। उन्होंने राज्यपाल से अभिभाषण नहीं पढ़ने की अपील की। बेनीवाल ने कहा कि यह सरकार के झूठ का पुलिंदा है, जो महामहीम द्वारा पढ़ाया जा रहा है।
बेनीवाल के साथ विपक्ष की तरफ से उप नेता प्रतिपक्ष रमेश मीणा और प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक गोविंद सिंह डोटासरा भी नारेबाजी करने लगी और हंगामा शुरू कर दिया। सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ ने परिस्थिति को संभालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक सदन हंगामे की भेंट चढ़ गया। हालांकि सरकार के सदस्यों और विधायकों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
इस दरमियान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चुपचाप पूरे सदन की कार्रवाई एक तक देखती रही। उन्होंने किसी भी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। विधानसभा अध्यक्ष ने बार-बार विपक्ष के सदस्यों को टोका और सदन को सुचारु रुप से चलने के लिए अपील की। लेकिन सदस्य नहीं माने और हंगामा करते रहे।
इससे पहले राज्यपाल कल्याण सिंह ने अभिभाषण पढ़ना शुरू किया तो हनुमान बेनीवाल अकेले ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने लगे। उनके साथ उप नेता प्रतिपक्ष रमेश मीणा ने भी प्रदेश में बेरोजगारों की बदतर स्थिति, किसानों की आत्महत्याएं और कर्ज माफी को लेकर सरकार पर तरह तरह के आरोप लगाए। इसके बाद विपक्ष के मुख्य सचेतक गोविंद सिंह डोटासरा ने भी राज्य में व्याप्त बेरोजगारी, किसानों की आत्महत्या दलितों पर अत्याचार और मीडिया के ऊपर लाए गए ।